शनिवार, 31 मई 2025

काहे मनवा कचोटता

  काहे मनवा कचोटता



काहे मनवा कचोटऽता,

                                       सोच-सोच के लोटऽता

माया मोह भरल दुनिया मे

जानऽता पर टोकऽता

काहे मनवा कचोटऽता



ज्ञान ज्ञान हम रटऽतानी,

                                       बस्ता भर भर घोटऽतानी

अज्ञानता के पोटऽतानी, 

खुद से खुद के चोटऽतानी

अइसन काहे होखऽता,

                                       काहे मनवा कचोटऽता


एके एगो कारण बाटे,

ना गीता ज्ञान केहू बाटऽत बाटे

संस्कार ना पाटऽत बाटे, 

मन मे मन ना आटत बाटे

एही से मन से मन टकराता, 

भीतरे भीतरे मन बउराता ।


                     उदय शंकर प्रसाद

शुक्रवार, 30 मई 2025

बनारस

     

       


        बनारस


मट्ठा दही के बात गजब बा

चिड़ियन के आवाज गजब बा

कहल जाला बडका शहर हऽ

मगर बोली मे मिठास गजब बा


गंगा के स्नान गजब बा

विश्वनाथ के धाम गजब बा

कहल जाला ठगन के नगरी

बनारस पे ई अभिशाप गजब बा


हनुमान गढ़ी के बात गजब बा

महाकारणिका घाट गजब बा

भुत प्रेत के जहवा मोक्क्ष मिलेला

उ बनारस के हि जजबात गजब बा


बी एच यु के संस्कार गजब बा

ज्ञान अउर सम्मान गजब बा

कहल जाला गलियन के नगरी

तबला अउर ढोलक के आवाज़ गजब बा


हरिश्चंद्र के राज गजब बा

लइका बिकाइल बात अजब बा

छीन गईल जेके सबकुछ

ओके इहवा मिलाल आशीर्वाद गजब बा


सारनाथ के इतिहास गजब बा

महाकाल के भओकाल गजब बा

त्रिसुल पर बसल ई नगरी

विश्व पटल पे एके इतिहास गजब बा

          उदय शंकर प्रसाद

गुरुवार, 29 मई 2025

माई अउर माई माटी

 

 

माई अउर माई माटी


हम गोर लागेनी उ माई के

जे माई माटी के करे सम्मान

माई माटी के रक्षा खातिर

दे देलक आपन लईका के बलिदान


उ माई के एगो लइका रहे

कइले रहे अबे बीयाह

माई माटी  के रक्षा खातिर

कइलक आपन लइका कुर्बान


अब विधवा मेहरी बिधावा माई

ना केहू के ओपे परछाई

जात धरम के ई दुनिया मे

जब ना पूछे आपन हि भाई


तब केतना बड़का त्याग उ कइलक

ना कुछ आगे ना पीछे धईलक

माई कहाय वाली हि माई

माई के घर के रक्षा कइलक

          उदय शंकर "प्रसाद"

बुधवार, 28 मई 2025

इच्छा

      इच्छा

अगर नींद से सुततानी

सुख चैन अउर आराम तले

ओके एके गो कारण बा

सीमा पे जवान खड़े

नींद भूख सब मारेला

अउर केतना अपमान सही ?

माई माटी के उहे बेटा

हम बानी बेकार कहीं

फूल अच्छत हम वरसईती

अगर सडक से उ जाईत

हमहू सेवा करती माटी के

जे एक बार मौका मिल जाईत ।

               उदय शंकर " प्रसाद "

सोमवार, 26 मई 2025

सव जनम महफूज

 

 

     सौ जनम महफूज

                                उ इज्जत के का मतलब

जे धन ला मिलल अधिकरी होये
उ रिस्ता के ना मतलब
जे लोभ भरल महामारी होये
मंदिर मे पूजा से पहिले
जहा ना गरीब खियावल जाये
उ पैसा के ना मतलब
जे चूस के केहू से कमावल जाये
गरीब लाचार अपाहिज के
जवन पैसा संतुस्ट करे
उ पैसा अगर ईमानदारी के
सव जन्म महफूज करे ।

       उदय शंकर "प्रसाद"

रविवार, 25 मई 2025

संकल्प

     

 

         संकल्प

काहे झुकी जब गलती ना बा

काहे रुकी जब लक्ष हि बा

गिर के उठेम उठ के चलेम

हिम्मत हि हमर हौंसला बा


चाहे धरती फाटे लागे

चाहे बिजली डांटे लागे

चाहे कही बिछल होये आगी

पर हिम्मत कबो ना हारी


रण भूमि के बनेम विजेता

कृष्ण से शिख बनेम रणनेता

युधिष्ठिर के विचार अपनाएम

आपन पताका हम लहराएम

           उदय शंकर "प्रसाद"

द्रोपदी, सभा अउर कृष्ण

 

                                      




द्रोपदी, सभा अउर कृष्ण

 

सब केहू सुतल रहे आंख खोल-खोल

सभे  लागावे ठहाका बोल-बोल

बिच सभा मे एगो औरत

रोअत रहे हाथ जोर-जोर


जे  सकुनी के पासा से रहे  पलटाईल

ना चाचा ना केहू , केहू के ले आईल

ना दुलहा ना देवर आईल

तब नाम् हरी के जिहवा पे भाईल


का करस हरी बड़ा दयालु

रणनीति मे बडका चालू

लोक लाज सब उहे बचइने

बडका रिस्ता उहे निभइने


               उदय शंकर प्रसाद

शनिवार, 24 मई 2025

सुखी जिनगी जिये के मंतर

     

 

      सुखी जिनगी जिये के मंतर

 

चीनी बिना मलाई नाही 

दूध जइसन दवाई नाही

तेल से जे करेला मालिश

बीमारी ओके सताये नाही 


उठक बइठक जे के आये

मेहनत हर दम जेके भाये

टेंसन के जे हरदम टरकाये

ओके नाही भय सताये


हरिहर साग, हरिहर सब्जी

नाहि मांस, बिना मर्जी

उल्टा पुल्टा जे भी खाये

बिन समय उ बैध बोलाये 


खाली पेट जे पियेला पानी

समय से सुते समय के जानी

नाही करे जे देह से छेड़ खानी

उहे बाटे राजा अउर उहे बिया रानी

       

              उदय शंकर प्रसाद