माई अउर माई माटी
हम गोर लागेनी उ माई के
जे माई माटी के करे सम्मान
माई माटी के रक्षा खातिर
दे देलक आपन लईका के बलिदान
उ माई के एगो लइका रहे
कइले रहे अबे बीयाह
माई माटी के रक्षा खातिर
कइलक आपन लइका कुर्बान
अब विधवा मेहरी बिधावा माई
ना केहू के ओपे परछाई
जात धरम के ई दुनिया मे
जब ना पूछे आपन हि भाई
तब केतना बड़का त्याग उ कइलक
ना कुछ आगे ना पीछे धईलक
माई कहाय वाली हि माई
माई के घर के रक्षा कइलक
उदय शंकर "प्रसाद"
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