शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

😀 “नून” 😀 (नमक )


                               


 

 😀 “नून”  😀 (नमक )
इक दिन बहुत हाहाकार मचल
भात ,दाल ,तरकारी में।
काहे भैया नून रूठल बा
बैठक भईल थारी में।
 
दाल- तरकारी गुहार लगईलक
नून के बैठ गोर थारी में
तरकारी कहलक सांस छूटता
दाल बा मरे के तैयारी में l
 
भात कहलक हे नाथों के नाथ
रऊआ बीना इ दुनूं अनाथ
रऊआ जे एकनी में मिल जइति
हमरो जीवन धन्य बनईति l
 
थरिया कहलक हम रहेम खाली -खाली
भात ,दाल, तरकारी जे ना हमरा के सम्भlली
बाज बाज के हम टूट जायेम
रऊआ जे ना एकनी के पाली l
 
फिर आगी सुन आईल भागल पडाईल
चुल्हा चौकी भी साथे लाईल
नून के लगे जा के
हाथ जोड़ रहे खड़िहाईल ।
 
आगी धईलक आपन बात
चुल्हा चौकी आऊर का हमर औकात
चीनी जे दे भी देता साथ
ना जलेम तबो हम दिन रात ।
 
फिर सब मिल , नून के बड़ाई कईलक
नून के खूब जयकार लगईलक
इ देख नून मस्त भईल
सब में मिल के ब्यस्थ भईल ल
 
उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग),


कोई टिप्पणी नहीं: