संकल्प
काहे झुकी जब गलती ना बा
काहे रुकी जब लक्ष हि बा
गिर के उठेम उठ के चलेम
हिम्मत हि हमर हौंसला बा
चाहे धरती फाटे लागे
चाहे बिजली डांटे लागे
चाहे कही बिछल होये आगी
पर हिम्मत कबो ना हारी
रण भूमि के बनेम विजेता
कृष्ण से शिख बनेम रणनेता
युधिष्ठिर के विचार अपनाएम
आपन पताका हम लहराएम
उदय शंकर "प्रसाद"
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