सौ जनम महफूज
उ इज्जत के का मतलब
जे धन ला मिलल अधिकरी होये
उ रिस्ता के ना मतलब
जे लोभ भरल महामारी होये
मंदिर मे पूजा से पहिले
जहा ना गरीब खियावल जाये
उ पैसा के ना मतलब
जे चूस के केहू से कमावल जाये
गरीब लाचार अपाहिज के
जवन पैसा संतुस्ट करे
उ पैसा अगर ईमानदारी के
सव जन्म महफूज करे ।उदय शंकर "प्रसाद"
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