मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

घउरा (Ghaura)



भोजपुरी कविता  "घउरा"

इयाद बहुत आवेला उ दिन ,
पुअरा के बराई हो
जहवा पुरा गाव मिले ,
उ घउरा के तपाई हो

खाना सबके घरे बने,
बड़का बड़का चूल्हा जरे
मिल बाट सब काम के करे,
तबो मिल जाय टाइम हो

इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो

सबके सब से प्यार खूब रहे
ना अईले पे खोजाई हो
गाव के रहस बड़की भौजी
करस उ मुखियाई हो

सभे उनके बात के माने
केहू ना झगड़ाईन हो
हा हा हि ही खूब होखे
पर केहू ना खिसियाई हो

इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो

रात रात भर  घउरा जरे
खींच खींच खूब पुअरा बरे
जेके जबे नींद खुले
उ घउरा पे आ जाई हो

राह चलत सब् केहू तापे
करे हांथ गोड सेकाई हो
जान सभे लोग बीठई देवे
प्यार से लोग बीठाई हो

इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो

उ घउरा मे कोन सेकाये
आलू भी डलाई हो
तनी तनी सबके मिले
फुक फुक घोटई हो

धीरे धीरे गाव ओराइल
बड़की भउजी माई हो
घर के बगल मे घर बनल
अब घउरा कहा बराई हो

इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराइल हो

            उदय शंकर प्रसाद



गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

आव‌ऽ मिल के उठाई कदम साथ में

 आव‌ऽ मिल के उठाई कदम साथ में


आव‌ऽ मिल के उठाई कदम साथ में
जेसे फर के फुलायें सभे लाभ में
चाहे होए गरीब, चाहे होए अमीर 
थाम लऽ हाथ से हाथ ले हाथ में

जेके घर होए चुअत आस के सांस में
ओके छप्पर बनावे के मिल साथ में
केहु होए मजबुर जेपे टुटल कहर
ओके बांटे के दुख, मिल, सभे साथ में

केहु होए रोअत थर-थर जार में
आवऽ ओढ़ाई रजाई मिल साथ में
जेके होए ना बेटा दुख देले होए मार
आव‌‌ऽ माई बोलाई ले सभे हाथ में

जहां घर हो‌ए जलत धुधु कर आग में
जहां सुतत होए लोग दुख ओढ़ रात में
जहां ना होए अंजोर अउर होए अन्हार
आवऽ दिया जलाई उहां साथ मे
             उदय शंकर प्रसाद

शनिवार, 20 दिसंबर 2025

बिहार (Bihar)

       


           भोजपुरी कविता "बिहार"

हम सीता के सहन हई
अउर लव कुश के माशूम
हम वाल्मीकि के ज्ञान हई
अउर राम के हई वसूल

हम सत्य के संघतीय हई
अउर अहिंसा के धाम
हम हिमालय के जनक हई
अउर चाणक्य हमर वरदान

राम के हम ससुरारी हई   
हई स्वागत अउर संस्कार
त्याग के हम परीक्षा हई
हम जीत हई हर बार।      

बुद्ध के हम बुद्धि दाता
महाबीर के भाग्य विधाता
हम ज्ञानी के ज्ञान के नगरी
पूजे जेके सगरो सगरी

गंगा के हम गगरी हई
सुपा हाथी चकरी हई
सूरज के मुस्कान हई
ठेकुआ उख प्रसाद हई

गुरु नानक के महतारी हई
सती के धारण धारी हई
नदियन के फुलवारी हई
सबसे न्यारी प्यारी हई

हम हि तोहमे तोहर हई
अउर ओकरा मे ओकार
हमही सब मे हुकार हई
अउर हमहि हई बिहार ।

            उदय शंकर "प्रसाद"



रविवार, 14 दिसंबर 2025

बिकेला न्याय


"_बिकेला न्याय_"
हा बिकेला न्याय
पइसा के सामने
ना टिके ला न्याय
पइसा के सामने
आजो ओकरा पे
बड़कवन के अधिकार बा
केस करेवाला हि
जायदा परेशान बा
हाजरी पे हाजरी
अउर  नियम विकलांग बा
का करब भैया ?
पैसा बलवान बा
बिना गलती के
सूचक पिटाला
एफ आई आर लिखवाके
न्याय मे दराला
कबो एफ आई आर कमजोर
तऽ कबो डायरी मे घोटाला
पइसा देले पे नाम हट जाला
छान बिन मे यदि गवाह लिखाई
अपराधी के  गवाह धराई
का करी सूचक
नाहि कवनो दवाई
हक ला लड़ी तऽ
फिरू थुराई
अपराधी  बाऽर सन
एही से ढिठाईल
जानऽ तारऽ सन
न्याय भइल बा मिठाई
मार करऽ
अउर लड़ऽ लड़ाई
फेकऽ पैसा तऽ
न्याय खरीदाई
पहिला बार
जे होइ सजाये
न्याय कहेला
छोड़ देवल जाएम
दूसर बार
फिरू देखल जाई
होइ मुक़दमा तऽ
होइ लड़ाई
दु चार नाही
पचीस बरस घिचाई
के जीई आ के मर जाई ?
एके नाही केहू बताई ?
तिन साल से निचे
जे होई सजाये
छोटका से बडका
अउर बडका ले जाई
फिरू जे होई
देखल जाई
ई सब जान
बदमशवा ढिठाइल
विकेला  न्याये 
अउर आगे बिकाई 
सूचक ला ना 
कवानो दवाई 
लडत लडत चप्पल घिसाई

          उदय शंकर "प्रसाद"








सोमवार, 8 दिसंबर 2025

पीठ पीछे


 पीठ पीछे


जेके जइसन सोच रहल
आपन सोच बतइलक
हम भला ना बुरा 
अपना के समझइलक

किताब देखले से ज्ञान होइत तऽ
ना आन्हर नगरी ना चउपट राजा होइत
सब केहू हाक़िम रहित 
केहू केहू से कम ना होईत

मूर्खन के पहचान हऽ ई 
या बड़कवन के शान हऽ ई
या समय बितावे के हऽ इ जरिया 
या निमनकन के पहचान हऽ ई 

निमन आदमी कबो ना करे 
दूसरा के बदनाम 
आपन धुन मे हर दम रहे 
चूप रहके करे सबके आदर अउर सम्मान ।

                   उदय शंकर प्रसाद