आवऽ मिल के उठाई कदम साथ में
आवऽ मिल के उठाई कदम साथ में
जेसे फर के फुलायें सभे लाभ में
चाहे होए गरीब, चाहे होए अमीर
थाम लऽ हाथ से हाथ ले हाथ में
जेके घर होए चुअत आस के सांस में
ओके छप्पर बनावे के मिल साथ में
केहु होए मजबुर जेपे टुटल कहर
ओके बांटे के दुख, मिल, सभे साथ में
केहु होए रोअत थर-थर जार में
आवऽ ओढ़ाई रजाई मिल साथ में
जेके होए ना बेटा दुख देले होए मार
आवऽ माई बोलाई ले सभे हाथ में
जहां घर होए जलत धुधु कर आग में
जहां सुतत होए लोग दुख ओढ़ रात में
जहां ना होए अंजोर अउर होए अन्हार
आवऽ दिया जलाई उहां साथ मे
उदय शंकर प्रसाद
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