शनिवार, 20 दिसंबर 2025

बिहार (Bihar)

       


           भोजपुरी कविता "बिहार"

हम सीता के सहन हई
अउर लव कुश के माशूम
हम वाल्मीकि के ज्ञान हई
अउर राम के हई वसूल

हम सत्य के संघतीय हई
अउर अहिंसा के धाम
हम हिमालय के जनक हई
अउर चाणक्य हमर वरदान

राम के हम ससुरारी हई   
हई स्वागत अउर संस्कार
त्याग के हम परीक्षा हई
हम जीत हई हर बार।      

बुद्ध के हम बुद्धि दाता
महाबीर के भाग्य विधाता
हम ज्ञानी के ज्ञान के नगरी
पूजे जेके सगरो सगरी

गंगा के हम गगरी हई
सुपा हाथी चकरी हई
सूरज के मुस्कान हई
ठेकुआ उख प्रसाद हई

गुरु नानक के महतारी हई
सती के धारण धारी हई
नदियन के फुलवारी हई
सबसे न्यारी प्यारी हई

हम हि तोहमे तोहर हई
अउर ओकरा मे ओकार
हमही सब मे हुकार हई
अउर हमहि हई बिहार ।

            उदय शंकर "प्रसाद"



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