भोजपुरी कविता "घउरा"
इयाद बहुत आवेला उ दिन ,
पुअरा के बराई हो
जहवा पुरा गाव मिले ,
उ घउरा के तपाई हो
खाना सबके घरे बने,
बड़का बड़का चूल्हा जरे
मिल बाट सब काम के करे,
तबो मिल जाय टाइम हो
इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो
सबके सब से प्यार खूब रहे
ना अईले पे खोजाई हो
गाव के रहस बड़की भौजी
करस उ मुखियाई हो
सभे उनके बात के माने
केहू ना झगड़ाईन हो
हा हा हि ही खूब होखे
पर केहू ना खिसियाई हो
इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो
रात रात भर घउरा जरे
खींच खींच खूब पुअरा बरे
जेके जबे नींद खुले
उ घउरा पे आ जाई हो
राह चलत सब् केहू तापे
करे हांथ गोड सेकाई हो
जान सभे लोग बीठई देवे
प्यार से लोग बीठाई हो
इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराई हो
उ घउरा मे कोन सेकाये
आलू भी डलाई हो
तनी तनी सबके मिले
फुक फुक घोटई हो
धीरे धीरे गाव ओराइल
बड़की भउजी माई हो
घर के बगल मे घर बनल
अब घउरा कहा बराई हो
इयाद बहुत आवेला उ दिन
पुअरा के बराइल हो
उदय शंकर प्रसाद

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