पीठ पीछे
जेके जइसन सोच रहल
आपन सोच बतइलक
हम भला ना बुरा
अपना के समझइलक
किताब देखले से ज्ञान होइत तऽ
ना आन्हर नगरी ना चउपट राजा होइत
सब केहू हाक़िम रहित
केहू केहू से कम ना होईत
मूर्खन के पहचान हऽ ई
या बड़कवन के शान हऽ ई
या समय बितावे के हऽ इ जरिया
या निमनकन के पहचान हऽ ई
निमन आदमी कबो ना करे
दूसरा के बदनाम
आपन धुन मे हर दम रहे
चूप रहके करे सबके आदर अउर सम्मान ।
उदय शंकर प्रसाद
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