शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

ताक द हम पे हे भगवान

 

ताक द हम पे हे भगवान

 

अब उब गईल बानी इ जिंदगी से
कहवा बा तोहर ध्यान
हम अग्यानी, मुरख, बेचारा
ताक द हम पे हे भगवान


हर जगह बा तोहर ठिकाना
हम में बसल बा तोहर प्राण
तोहर इसारा बिना ना हिले
तिनका तिनका न कवनवो समान


तू हव सबके मलिक
सब जग करे तोहके प्रणाम
फिर तू कlहे रूठल बारऽ हमसे
जिंदगी पा सहतानी अपमान


अब आउर ना तू देर करऽ
टुट रहल बा सीमा के बांध
हाथ जोड़ हम मांगतानी माफि
जवन भी कईले बानी हम अपराध


का भूल भईल ना हम जनतानी
कुछ बोल या करऽ उद्धार
पाप आऊर पुन्न के लेखा जोखा कर
माफ कर हमके हे भगवान

उदय शंकर "प्रसाद"

       

भारत

 

भारत

 

भारत देश हमार, जेके रुप माई समान
चेहरा काशमीर, मुडी हिमालय मुकुट के पहचान
बायां हाथ अरु, आसाम
मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मनिपुर,नागा अउर मुटान
दाहिना हाथ गुजरात अउर राजसथान
गोड कर्नाटक, आंध्रा, तमिलनाडु, केरला शितलता के प्रमाण
इनके ढेरों ल‌इका विर अउर विद्वान
पंजाब अउर हिमाचल लागे गला
हरियाणा , दिल्ली लागे दिल के निशान
मध्यप्रदेश, छत्तिसगढ़, उत्तरप्रदेश,झारखंड, बिहार अउर बंगाल
लागे माई के गोंड के समान
उत्तराखंड अउर सिक्किम हऽ कंधा के भाग
महाराष्ट, तेलंगाना, उड़िसा मिल बनल भारत महान
जेके गोड धोयेला सागर
जे में बसल गंगा जमुना सरसवति के गागर
जेके साडी हऽ तिरंगा, हर भाग में बहे प्यार के गंगा
ओके गोड छु करी हम प्रणाम
जय जय भारत देश महान ।

 

पहचान

 


पहचान


 

हम बिगड़ ग‌इल होती
गुरु जी जे ना मरले होते
बाबु जी जे ना डटले होते
भ‌इया जे ना हमके समझ‌इते
आवारा रूप में हमके प‌इते

बहिन जे ना स्नेह देखाइत
माई जे ना हमके खियाइत
झोरी में ना बसता सरीयाइत
आवारा रूप में हमके पाइत

सुते में हम रहनी अभागा
लेके द‌उडी पतंग के धागा
सिकायत जे ना घरे आइत
आवारा रूप में हमके पाइत

सही ग़लत के ना रहे ज्ञान
जवन मन करे करी होके अज्ञान
ना कबो सही राह भेटाइत
आवारा रूप में सभे हमके पाइत

धीरे-धीरे हम प‌इनी ज्ञान
हमके मिलल आपन पहचान
सभे मिल के ना हमके घिसले होइत
आवारा रुप में हमके पाइत

जे-जे मिल के हमके घिसलक
ज्ञान के संगे हमके मिसलक
आभारी हो हम करतानी प्रणाम
ओके चलते मिलल हमके पहचान ।

 


गिर के उठनी

                       

                 गिर के उठनी

 

आज उठे के समय हमरा मिलल
देख हमरा के कवनो जल उठल
खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से
गिर ग‌इनी देख दुनिया हंस पड़ल


का करती हम अभीन उठल रहनी
मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी
देख इ हंसी अब हम ठान लेहनी
ले सही सोच फिरु से चल देहनी


झेंप ग‌इनी सारा ताना सड़क के फूल समझ के
बढ़त रहनी सबके बात मन में हम रख के
सोच लेनी इ सड़क से हम लौटेम ओ दिन
जे दिन लोग करी प्रणाम हमरा साहब समझ के


हम पहुंचनी मंजिल सौ बार गिर के
गोंड थाकल, जिव हारल, छाला पडल चल के
मगर आज बहुत खुश रहनी मंजिल साथ लेके
देखत रहे आज दुनिया मुड़ी उठा के


ले फूल माला अउर जयकार उ बोलत रहे
रात दिवाली दिन में होली उ खेलत रहे
देख इ सब हम पिछे के सब भुला ग‌इनी
हम सबके साथ मिल शुरु होली क‌इनी ।


समोसा

 

समोसा

 

 

आज खड़ा रहनी हम बजार में
भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में
दुकानदार चि‌‌ललात रहे हर चिज़ के दाम के
तले एगो ल‌इका ले उडल कवनो समान के


चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल
का चोर‌इले रहे ना केहु के पता चलल
उ ल‌इका आवाज सुन डेरा ग‌इल
भागल जोर से अउर गली में लुका ग‌इल


डरल सहमल अउर ऊ दुबकल रहे
जाके देवाल के कोना में चिपकल रहे
तनी देर बाद जब मामला ठंढा ग‌इल
जेब से निकाल उ समोसा खा ग‌इल ।

मौत

 

मौत


हम अकेले ब‌इठ के कुछ सोचत रहनी
गाल पे रख हाथ कुछ देखत रहनी
तलेक कान में कहीं से घंटी के आवाज ग‌इल
निंद टुटल, होश उड़ल अउर दरद भ‌इल


एगो सवारी लेट, चपाटी पे चलल
आगी, माला,फूल,पानी सब संघे बढल
कवन देश-दुनिया अउर राह में चलल
सब छोड-छाड राज सिंहासन बस चल पड़ल


कर आंख बंद चुपके से चुपचाप भ‌इल
हाथ फ‌इलल, गोंड पसरल अउर सब सन्न भ‌इल
सोर-सराबा, हलला-गुलला के भी ना पता चलल
देख इ सब दिल में जोर से दरद उठल


ज्ञान-विज्ञान अउर संज्ञान सब फिका पडल
कवन देश हऽ आज तक ना केहु के पता चलल
हसत खेलत कूदत नीमन रहल
तनी देर में का भ‌इल ना केहू के पता चलल


दिल दरद पिडा से भरल, आंख रो पड़ल
भगवान अउर इंसान में तब फरक मिलल
कुछ बा इंसान के सिवा जे इ दूनिया चलावेला
आज इ देख अउर सोच के मालूम चलल ।

उदय शंकर "प्रसाद"


समय

 

समय 


 

झकझोर देलऽक दुनिया ओके झोर के
लूट लेलऽक मिठ ओ से बोल के
अउर तुडलक ओके मडोड के
आज हसेला लोग देख के ओके जोर से


झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के

सब केहू ग‌इल ओके छोड़ के
दरद ओके खायेला खोर-खोर के
ना केहू देवेला साथ कमजोर के


हसेला दुनिया देख के ओके जोर से
झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के

कबो जवाना छुअत रहे ओके गोड के
आज सुनेला बात चारों ओर से


साथे लोग ब्इठत रहे काम छोर के
आज हसेला सबे ओके देख के जोर से
झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के

समय अ्इसन आइल छाइल घटा घन-घोर के


मिट ग‌इल नामों निशान जिंदगी में अंजोर के
अ‌इसन पाला पड़ल समय मुंह जोर के
गिर ग‌इल मुहखुडिया उ जोर से
झकझोर देलक दुनिया ओके झोर के

श्मशान

 

 श्मशान 


 

चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे
फूल ,पईसा के होत बरसात रहे
राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे
केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे


भीड़ चलत रहे ओके साथ मे
जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले
सब कुछ छोड़ आज ऊ जात रहे
का नाता का रिश्ता ना कुछ बुझात रहे


आज ऊ गईल शमशान में
सुत लकडी पे मिल गईल आग में
छोड़ सबकेहू ओके नहात रहे
कहा गईल ऊ नाहीं कुछ बुझात रहे ।

 

काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब

 

काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब 

 

 

दुख के घड़ी में सभे याद आइल
सुख के घड़ी में जब सभे भुलाईल
तब केके सहारा चाहि हो यार
काहे कहेल दुनिया बाटे खराब


पइसा घमडे तु मरत रहलऽ
दुसरा के देख के तू जरत रहलऽ
नाहिं जनलऽ तू कथी कहल जाला प्यार
त काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब


न भाई-बहिन, माता-पिता चीन्हाईल
न साथी-संगति कबो याद आईल
अईसन तू कईलऽ सबके संघे हो यार
तऽ काहे कहेलऽ दुनिया बाटे खराब


कबो दूधे से रहलऽ तुहु नहात
सोने के थारी में रहलऽ तू खात
आपन केहू नाहीं आवे हो याद
तऽ काहे कहेल दुनिया बाटे खराब


अब पश्तईले पस्तावा का होई
दुख के घड़ी में सभे यादें आईल
अईसन दुबारा ना करिहऽ हो यार
अउर न कहिय दुनिया बाटे खराब

 


👦चेहरा👩

 

👦चेहरा👩


 

कहाँ गेईल ऊ माटी पे से चेहरा

टाटी पे रचल बतावे कुछ गहरा

गांव देहत में लऊके सुनहारा

मिट गईल बा ओपे पहरा

 

हर टाटी पे कुछ अलग गढ़ल रहे

हिरण के पिछले बाघ दऊड़त रहे

जिंदगी और मौऊत दूनो झलकत रहे

अइशन रहस्य ओपे मढल रहत रहे

 

इयद बहुत आवेला ऊ दिन

माटी में लोटाईल, माटी से हर दिन

बिन कागज ,कलम ,दावत बिन

अंगुली से बनाई माटी पे देख चित्र

 

चित्रा कला के रहे नमुना

हस्त कला के उपजल सोना

देख चित्र कुछ इयाद दिलावे

दिमाग में सट के रहस्य बनवे

 

मगर जवाना अइसन पलटाईल

टाटी के जगह ईट जोड़ईल

प्रकृति से साफे मुंह मोडाईल

आपन कला अपना हंथो लुटाईल

🔅दिया काहे बुझ गईल🔆

 

🔅दिया काहे बुझ गईल🔆


 

दिया काहे बुझ गईल
तेल के कमी से, या पईसा के नमी से
सब केहु कहे सुत गईल
दिया काहे बुझ गईल


न कवनो आवाज, न कवनो पता हिलेला
चारो तरफ काहे अंधेरा ही अंधेरा दिखेला
इ शहर में कईसन हावा चलेला
चारो तरफ दर्द भरल आवाज गूंजेला


हर पग पर मातम ही मातम दिखेला
समय बा अईसन ना केहू के तन ढकेला
हर आंख में पहिले आशा , फिर निराशा झलकेला
पानी बिन मछली जईसे, लोग बयाकुल दिखेला


हर तरफ धुआ ही धुआ उडेला
ना केहु आपन सभे पराया दिखेला

हर जगह ठेस ही ठेस ला इंट गडल बा
हर नगर , हर चौराहा पर मौत ही मौत दउडेला


खून से लथ पथ लाश पे इंसान चलेला

लोग काहे लोग के इज्जत से खेलवाड़ करेला
अदामी ही कही जानवर कही हैवान बनेला
काहे अदामी ही अदामी के संहार करेला


देख के ई सब दिल काप उठेला

दिल ईश्वर से हाथ जोड़ विनती करेला
हे ईश्वर ई समय के जलदि से हटा द
चारो ओर दिया ही दिया फिर से जला दऽ

 

👵बुढ़िया👵

 

👵बुढ़िया👵


 

दूर झोपड़ी में रहे, बहुत अन्हार।
ओमे से आवत रहे, मरत दिया के प्रकाश!
चारों ओर सन्नाटा ,कईले रहे प्रहार।
लागत रहे पेड़ पौधा अउर सब के लागल बा बुखार


ना कवनो पत्ता हीलत रहे,जाने कौन रहे बात?
हवा भी मोड़ लेले रहे मुंह, चलत रहे समय इतना ऐतना खराब।
दु डेग जब आगे बढ़नी, आवत रहे रोए के आवाज।
फूट-फूट के रोवत रहे बुढ़िया, सामने पड़ल रहे बेटा के लाश!


मालिक के बहुत पहिले हो गईल रहे स्वर्गवास!
फूट-फूट के रोवत रहे बुढ़िया सामने पड़ल रहे बेटा के लाश!


माई से पहिले बेटा मर गईल, एकरा से बड़का का होई बात!
के उठाई चपाटी ओके, केहू कब तक दी ही साथ?

अपना सामने देख बेटा के चपाटी , रोयले बड़बड़आत।
पुछे ले विधाता से, काहे आइसन कईल हमरा साथ।


आज विधाता भी बंद कईले बाने, आपन आंख!
कान में रुई डाल के सुतताने दिन-रात!

कहां गइल न्याय उनके, कवन जन्म के कईले बिया पाप?
ना रहल केहूं अब सहारा, हो गईल ऊ बर्बाद।


तनी देर में भीड़ जुटल , सब केहूं देखत रहे चुपचाप
आंख में लोर भर आईल , अउर जकड़ गईल आवाज

सब के शरीर शून्य भईल देख बुढ़िया के अइसन हाल
फूट-फूट के रोवत रहे बुढ़िया सामने पड़ल रहे बेटा के लाश!


लोग मिल -जुल के कईलक , बेटा के कामकाज।
फूट-फूट के रोवत रहे बुढ़िया सामने पड़ल रहे बेटा के लाश!

बेटा ह बुढ़ापा के सहारा, दूल्हा होला दिल के बात।
आज ओके दुनु ना रहल, ना खाए के अवकात


बुढ़िया बहुत बुढ़ भईल, न चलेके सवकास
छांनी भी अब चुये लागल बा, घर ले लेले बा अवकाश

दूर-दूर तक घर ना रहे, रहे पुरा सुनसान
कुत्ता भी ना दिखाई देवे, रहे जगह ऐतना शांत


आइसन समय में ओके, का होई हाल
सोच -सोच के बुढ़िया के टूट गईल बा आस।
फूट-फूट के रोवत रहे बुढ़िया, सामने पड़ल रहे बेटा के लाश!


धीरे-धीरे खाना-पीना, छुटल, खटिया देलक साथ
एक दिन आत्मा भी छुटल, घर में पड़ाल रहे लाश
धीरे-धीरे इ बात पसरल, फिर आईल जमात
काम क्रिया बुढ़िया के भईल, दिया गईल बुझा।


भिखमंगा


भिखमंगा 


 

भुख से टुटल बा, पेट ओके रुठल बा

दु दाना के आश बा, ओके इहे पियास बा

 

लोटा ओके हाथ में, एगो कपड़ा साथ में

दर-दर उ भटक रहल बा, रोटी के तलाश में


समय से झगड़ा बा, आंख से लंगड़ा बा

सबसे ओके आश बा , कुछ खाये के पियास बा

 

मुख से टुटल बा, पेट ओके रुठल बा

दु दाना के आश बा, ओके इहे पियास बा


एगो ल‌इका साथ में , लाठी ओके हाथ मे

अउर ऊ जूझ रहल बा , समय के हड़ताल मे

 

दिल से तगड़ा बा , ना केहू से झगड़ा बा

बस कुछू के आश बा,ओके ईहे पियास बा


भुख से टुटल बा, पेट ओके रुठल बा

दु दाना के आश बा, ओके इहे पियास बा

 

पेट चिपकल पिठ मे, सिना ओके रीढ़ मे

अउर ऊ तड़प रहल बा, पेट के भुचाल में


पुरा तरह से टुटल बा, ना केहु से रुठल बा

ओके ना कुछ नाखास बा, बस खाये के आश बा

 

👴बुढ़ के फरियाद👴

 

                           



👴बुढ़ के फरियाद👴


मंदिर गईनी , मसजिद गईनी , कईनि सगरो इयारी
उहा केहू ना सुनलक त, अईनी रउआ दूआरी


उम्र हमर ढल गइल बा, पाच गो भईली नारी
बाकी एगो बच गईल बिया, बिया उ कुआरी


बेटा हमर दुगो बा लोग, निकलल लोग फिरारी
भइल बीयाह जब से तब से बस गईल लोग ससुरारी


बेचता लोग हमर अरजल, ना देम त उ लोग मारी
कईसे करी बियाह बेटी के, अईनी राउर दुआरी


काट लेम हम आपन जिंदगी, भले बन भिखारी
मर जायेम त के देखी, बिया मासुम अउर प्यारी


आईल बानी आश लेके, जज साहेब बाटे बिपदा भारी
बेटी अभी कुआर बिया, कुछ त पुडीया मारी।

🙋सब के फुलईले चलऽ 🙋

               

                            


🙋सब के फुलईले चल चलऽ 🙋

सब के फुलईले चलऽ
धुल खुशी के उडईले चलऽ
कब, कहवा, कईसे रात हो जाई
जब ,जईसे ,जहवा जे मिले
प्यार् के भेट ओके बढईले चलऽ

का टिस, का रिस,
का खिस, का विस
दिल सगरो के जित
ना केहु के कबो दबईले चलऽ
प्यार् के ढिबरी जलईले चलऽ 


❤ चाह के चाहत ❤


                             


❤ चाह के चाहत ❤ 

चाहत बा कि तु हमरा मे,
हम तोहरा मे बस जईती
जियत मुअत हसत खेलत
बस तोहरे नाम ही गईति


तीनो लोक के तु स्वामी
दास तोहर बन जईती
तोहर गोड के धोअल धुल
माथा पे लगईती


तन मन धन सब तोहर
हर जन्म मे तोहके ही पईती
मांग मे सिंन्दुर तोहसे
जियत, मुअत अउर मुअले पे सजवईती ।

👸महल👸

                         

                                  


                 👸 महल👸

 

                    धूल में मिल के सब धूल भईल

का पताका , का सिंघासन कवन भुल भईल
आज दुनिया देख रहल चुप चाप ओके
छप पन्ना में पढ़ल इतिहास भईल


शान, शौकत आऊर तमाशा सब खाक भईल
का पता कवन आग में जल के राख भईल
तोप दागत रहे कबो सलाम ओके
सजल सजावल आज सब बरबाद भईल


झर रहल ऊ महल कंकाल भईल
धर गोड कबर में बचल निशान भईल
चिंख भी मिट गईल बा देवार के
आज ऊ दुनिया जईसे शमसान भईल l
e


एके सुने ला निचे  लिंक देवल बा ।


https://youtu.be/SODNnRNg68w?si=WGp1CIJx6P8wgDNx

👌जय हो बिहारी जय हो बिहार👌

                           

                             


       

👌जय हो बिहारी जय हो बिहार👌

दाल-भात चोखा संगे आचार
बर्गर पिज्जा के का औकात
नुडल चाउमिन के बड़का बाप
लिट्टी चोखा पे घी तब छाछ
देसी जोगाड अउर देसी अंदाज
जय हो बिहारी जय हो बिहार


धोती कुर्ता अउर गमछा पे नाज़
भुजा ,चिवड़ा, मिठठा, मरचा,अचार
लाई, तिलुआ, अउर बन्हाला केसार
पुआ-पुडी अउर ठेकुआ प्रसाद
ठेठ विचार अउर सिधा व्यवहार
जय हो बिहारी जय हो बिहार


नाता रिश्ता अउर निभावेला साथ
क‌ए गो भाषा अउर क‌ए गो जात
राम-राम कहले से होला शुरूआत
एके अनोखा आपन इतिहास
अइसन माटी के हम करी प्रणाम
जय हो बिहारी जय हो बिहार

👌बेलना-चौकी👌

                        

                           


👌बेलना-चौकी👌


तोहरा का बनेके बा
बेलना या चौकी


बेलना दबावेला, बजावेला, घुमावेला
चौकी देखेला, सहेला, निभावेला
चौकि जानेला, मानेला, पहचानेला
बेलना कुचलेला, उछलेला, ठुकरायेला


बेलना जब-जब फिसलेला
चौकि तब-तब रोकेला
बेलना बार-बार उमड़ के जायेला
चौकि ‌‌‌रुक शांत हो मुसकरायेला


दुनु के क‌इसन मेल बा
बेलना अउर चौकि के क‌इसन खेल बा
एगो शान्ति के पहचान ह‌ऽ
दुसर हुरदुग के निशान हऽ


अगर एगो शान्त होके ना सहित
रोटी अच्छा क‌इसे होइत
क‌इसे पेट भरा‌इत
रोटी क‌इसे भाइत


चौकि बेलना के अंतर जानऽ
का बनेंके बा तु पहचानऽ

 


🙏~~_बुरबक बिहार_*~~ 🙏


           

 


~~_बुरबक बिहार_*~~ 

हम बुरबक बानी बुरबक रहेम 
सबके चाचा भ‌ईया कहएम
दादा दादी फुआ कहएम
हम बुरबक बानी बुरबक रहेम 
 
लोग कहेला ना जहिय बिहार
ज‌ईब तऽ तु ख‌ईबऽ मार
गोली बंदुक अउर गुंडा राज
काहे से कि बा बुरबक बिहार
 
लेकिन का करबऽ ए भाई
अर्थशास्त्र बा ईहवए से आईल
राजनीती के बीया बोआइल
विश्व विजेता ईहवए से कहाआईल
 
सत्याग्रह हऽ ईहवए के देन
धोती, कुर्ता अउर गमछा पेन
क‌इलक बिहारी खुब लड़ाई 
तब जाके आजादी आइल
 
रामायण बा ईहवए लिइखआइल
ज्ञान के गंगा के जड़ बोआईल
एके जेतना करी बड़ाई 
कम बांटे ई मानऽ भाई
 
लिट्टी, चोखा अउर भुजा आचार
पलथी मारी, खाई, निक विचार
मुडी टेका के करी प्रणाम
एक बार आई देखी बिहार
 
सच कहेनी सुनऽ ऐ भाई
बिहार में बहार बा, ना कहीं भेटाई
मन होखे तऽ एक बार आई
बिहार के समझी, जानी अउर जाई ।
                                   

                उदय शंकर "प्रसाद"