शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

❤ चाह के चाहत ❤


                             


❤ चाह के चाहत ❤ 

चाहत बा कि तु हमरा मे,
हम तोहरा मे बस जईती
जियत मुअत हसत खेलत
बस तोहरे नाम ही गईति


तीनो लोक के तु स्वामी
दास तोहर बन जईती
तोहर गोड के धोअल धुल
माथा पे लगईती


तन मन धन सब तोहर
हर जन्म मे तोहके ही पईती
मांग मे सिंन्दुर तोहसे
जियत, मुअत अउर मुअले पे सजवईती ।

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