शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

श्मशान

 

 श्मशान 


 

चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे
फूल ,पईसा के होत बरसात रहे
राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे
केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे


भीड़ चलत रहे ओके साथ मे
जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले
सब कुछ छोड़ आज ऊ जात रहे
का नाता का रिश्ता ना कुछ बुझात रहे


आज ऊ गईल शमशान में
सुत लकडी पे मिल गईल आग में
छोड़ सबकेहू ओके नहात रहे
कहा गईल ऊ नाहीं कुछ बुझात रहे ।

 

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