शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

गिर के उठनी

                       

                 गिर के उठनी

 

आज उठे के समय हमरा मिलल
देख हमरा के कवनो जल उठल
खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से
गिर ग‌इनी देख दुनिया हंस पड़ल


का करती हम अभीन उठल रहनी
मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी
देख इ हंसी अब हम ठान लेहनी
ले सही सोच फिरु से चल देहनी


झेंप ग‌इनी सारा ताना सड़क के फूल समझ के
बढ़त रहनी सबके बात मन में हम रख के
सोच लेनी इ सड़क से हम लौटेम ओ दिन
जे दिन लोग करी प्रणाम हमरा साहब समझ के


हम पहुंचनी मंजिल सौ बार गिर के
गोंड थाकल, जिव हारल, छाला पडल चल के
मगर आज बहुत खुश रहनी मंजिल साथ लेके
देखत रहे आज दुनिया मुड़ी उठा के


ले फूल माला अउर जयकार उ बोलत रहे
रात दिवाली दिन में होली उ खेलत रहे
देख इ सब हम पिछे के सब भुला ग‌इनी
हम सबके साथ मिल शुरु होली क‌इनी ।


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