सोमवार, 23 जून 2025

फूटल घर

 
            फूटल घर


आज पहल कर गइल, घर मे दखल कर गइल
रहे ओके विचार घर फोडे के, घर के बरबाद कर गइल
बहूत भरल पूरल रहे धर, खुशी से भरल रहे हर पल
जाने कवन नजर पड गइल, घर के बरबाद कर गइल
भाई माई से रहे अइसे जइसे सौ बरस के नाता
केहू कमाये , केहू खाये ना फिकीर रहे के आवता जाता
अइसे लागत  रहे जइसे घर मे खेलत होये विघाता
सभे लागे जइसे लछमी से नहाता
मगर जाने कवन अइसे आँघी आइल 
भाई भाई अउर सास बहू सभे बिखराइल 
लइका फइका सभे छिछियाइल
जाने कइसन घडी घर मे आइल
जवन घर से डरत रहे समाज
इजजत से नाम ले करत रहे नाज
आज उ घर अइसे बिखराइल
जइसे तोरी के सूखल दाना छितराइल
भाई के बिना ना भाई कबो रहे
तिनका तिनका सब बात मिल कहे
मगर आज जेके नजर उ घर पे जाता
कबूतर के जइसन दाना , उ घर फोड खाता
केके कहल जाये केके बाटे दोष
केके करम फूटल अउर के बा बिन दोष
मंदिर के जइसन घर बाटे आज बटाइल
घर के भेद बाहर लेक आइल
एेही से सब केहू आज मिल लेवे ला माजा
जेके मन भइल उहे देवेला साजा
अइसन दिन आज उ घर के आइल 
नाम पता गाँव सबे भूलाइल ।

                       उदय  शंकर  प्रसाद


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