भोजपुरी कविता खाली शब्दन के खेल ना हऽ, ई माटी से जुड़ल जिनगी के साँच-साँच भाव हऽ। एह में गाँव-देहात के महक, मेहनत-मजदूरी के पीड़ा, माई के ममता, प्रेम के मिठास आ विरह के कसक सजीव रूप में झलकेला। एही से भोजपुरी कविता पढ़ल ना, महसूस कइल जाला जेके कारण भोजपुरी कविता मन में गूंजत रहेला। हम आपन कविता बहुत सादा भाषा में गहिर भावना के अइसन ढंग से पिरोए के कोशिश कइले बानी कि कविता सीधे कविता पढ़े वाला के दिल में उतर जाए। हमार कविता बनावटी ना होके आम आदमी के अनुभव, लोकसंस्कृति आ समाज के सचाई के आईना हऽ।
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