भोजपुरी कविता खाली शब्दन के खेल ना हऽ, ई माटी से जुड़ल जिनगी के साँच-साँच भाव हऽ। एह में गाँव-देहात के महक, मेहनत-मजदूरी के पीड़ा, माई के ममता, प्रेम के मिठास आ विरह के कसक सजीव रूप में झलकेला। एही से भोजपुरी कविता पढ़ल ना, महसूस कइल जाला जेके कारण भोजपुरी कविता मन में गूंजत रहेला। हम आपन कविता बहुत सादा भाषा में गहिर भावना के अइसन ढंग से पिरोए के कोशिश कइले बानी कि कविता सीधे कविता पढ़े वाला के दिल में उतर जाए। हमार कविता बनावटी ना होके आम आदमी के अनुभव, लोकसंस्कृति आ समाज के सचाई के आईना हऽ।
रविवार, 27 जुलाई 2025
शुक्रवार, 25 जुलाई 2025
लाचार
लाचार
बहुत मेहनत से उ एगो घर बन इले होई
पसीना जोड़ जोड़ एगो इंट सजईले होई
मगर बेहाया बेशरम समय ओके बा
तुड़े वाला ना जाने केतना दिल जलइले होइ
सालो के मेहनत मटिया मेट भइल होई
फूलन के बगिया तनी मे उजरल होई
केहू दरद पूछे ओके त खाली पूछले भर होइ
का गुजरल होइ ओ पे ना समझल होई कोई
मगर लाचार वेवस केसे कहे कहवा जाई
ना थाना ना पुलिस अउ र नाही केहू भी आई
बड़ी जालिम ई दुनिया फायदा देखी बतियाई
सही ईमानदार हमेशा पिसाईल बा पिसाई
बहुत मेहनत से उ एगो घर बन इले होई
पसीना जोड़ जोड़ एगो इंट सजईले होई
मगर बेहाया बेशरम समय ओके बा
तुड़े वाला ना जाने केतना दिल जलइले होइ
सालो के मेहनत मटिया मेट भइल होई
फूलन के बगिया तनी मे उजरल होई
केहू दरद पूछे ओके त खाली पूछले भर होइ
का गुजरल होइ ओ पे ना समझल होई कोई
मगर लाचार वेवस केसे कहे कहवा जाई
ना थाना ना पुलिस अउ र नाही केहू भी आई
बड़ी जालिम ई दुनिया फायदा देखी बतियाई
सही ईमानदार हमेशा पिसाईल बा पिसाई
शनिवार, 12 जुलाई 2025
हे प्रभु
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
सब कुछ पावे के जे हमरा
लागल बा जे दिल पे चोट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
दे सक त तु द
प्रेम अउ र आराधना
कर सकी हम पूजा अउर प्रार्थना
ना रहे मन मे कवनो दुख अउ र खोट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
जग जनता हम जानतानी
सब बेकार् बा तोहरा सिवा ई मानतानी
फिर काहे मन घोटाता
सब कुछ पावे ला खुन के घोट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
द तु हम पे ए ताना पहरा
छोड़ दी सब कुछ पे तोहरा
अउ र ले सकी तोहरा गोद मे ओट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
मन के गति बा सबसे तेज
कईसे करी एसे परहेज
करे के चाहतानी तोहसे भेट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
तु बन हमार संघाती
हम बनी दिया अउर तु बन बाती
बस मन के तु ल पोट
हे प्रभु
हे प्रभु मीटा द मन के लोभ
शुक्रवार, 4 जुलाई 2025
मजबूर
मजबूर
खुन के छिट्टा पडल, अउर पागल हो गइल
ना कवनो जुर्म कइलक, कवन दुनिया में
खो गइल
जब तक उ रहे दिवाना, शान अउर पहचान
के
सब केहू घुमत रहे, लेके ओके हाथ पे
आज समय अ्इसन आइल बा, लोग फेंके ढेला
तान के
कहां गइल मानवता, सभे हंसे जोर से
ठान के
सब केहू कहेला ओके, पागल भइल बा
जान से
रख जवाना देखें अपना के, ओके
जगह पे ध्यान से
मिल जाई सबुत जे दरद के, ओके
स्थिति जान के
छोड़ दी मारल ताना, ओके आपन मान के
।
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