बखारी
बास के चचरा गोल गोल मोडाईल
ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल
माटी के लेप चचरा पे लेपाईल
बखारी के रूप लेके सीधा खड़ियाइल
फिर टीका लागल अगरबत्ती बाराईल
साल दू साल ला अनाज ठुसाईल
दुआर के शोभा सम्मान कहाईल
लोग के धन बखारी से गीनाईल
जेके दुआर पे जेतना बखारी
ओके इज्जत ओतने ओतना ठुमकारी
जमीन जायदाद के अंदाज बतावे
ज्यादा रखले पे लोग धनिक कहाये
आज ऊ बखारी कहवा भुलाइल
सऊसे दुआरी छोटे में समाईल
खेत के अनाज अब दोकान पे बेचाईल
बखारी के नाम जड़ से ओराईल l

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