शनिवार, 21 जून 2025

बखारी

 

         


बखारी

बास के चचरा गोल गोल मोडाईल

ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल
माटी के लेप चचरा पे लेपाईल
बखारी के रूप लेके सीधा खड़ियाइल

फिर टीका लागल अगरबत्ती बाराईल

साल दू साल ला अनाज ठुसाईल
दुआर के शोभा सम्मान कहाईल
लोग के धन बखारी से गीनाईल

जेके दुआर पे जेतना बखारी
ओके इज्जत ओतने ओतना ठुमकारी
जमीन जायदाद के अंदाज बतावे
ज्यादा रखले पे लोग धनिक कहाये

आज ऊ बखारी कहवा भुलाइल
सऊसे दुआरी छोटे में समाईल
खेत के अनाज अब दोकान पे बेचाईल
बखारी के नाम जड़ से ओराईल l

कोई टिप्पणी नहीं: