कबड्डी ( बाल कविता )
आवऽ कबड्डी खेली हम
रेखा के एने ठेली हम
दौड़ दौड़ के पकड़ी हम
एने ओने जकड़ी हम
शोर मचाई दउडल जाई
उठा पटक हुरदूँग मचाई
कबो जिया ई कबो मुआई
जिया मुआ के गोल बनाई
माटी मे हम खूब लोटाई
कबड्डी कबड्डी आव चिलाई ।
ई कविता के सुने ला निचे लिंक पे जाई ।

1 टिप्पणी:
Nice
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