मंगलवार, 17 जून 2025

भाग्य

     




  भाग्य
आज देखनी हई ओके माई के चेहरा
शायद कुछ कहत रहे
लइका के जिनगी अउर मौत के बिच 
 उ रोअत रहे
बहूत मिनत के बाद लइका भइल
अउर घर मे भरल हरियाली 
मगर कुछ बरष के बाद मालूम चलल
लइका के ना पैर बा अउर बा कवनो बिमारी
सोचत रहे कवन जनम मे कइले बानी पाप
जे आइल बा इ महामारी 
लइका भगवान के रूप होला
काहे भइल विकलांग लइका इहे
अउर एकरे साथे आइल हमरे काहे बारी
जरूर बा कूछ पहिले के पाप
जेमे हम अउर हमर लइका होइ सामिल
एही ला आज रोये के पडता
अउर घुट घुट के उहवा जाये के होता तैयारी ।


कोई टिप्पणी नहीं: