शनिवार, 14 जून 2025

🙏 लव खुश चरित्र 🙏

 






This poem is written by Uday Shankar Prasad
     
                                कवि के कलम से 
 भोजपुरी  भाषा अऊर साहित्य के इतिहास काफी पुराना ह l एके उत्पति ब्रह्म लिपि से मानल जाला लेकिन कुछ कारण से भोजपुरी भाषा के वास्तविक लिपि के लोप हो गइल तथा एके मूल लिपि कैथी के जगह देवनागरी लिपि धीरे धीरे अपन स्थान ले लेलक  l       
                      हम फ्रेंच ,इटालियन, पोलिश अऊर  पाली आदि जइसन कई भाषाओ के अध्यन कइनी l लेकिन हमारा जवन प्रेम , शांति अऊर सुख भोजपुरी भाषा से मिलल उ शायद हमारा अन्य भाषा से ना मिलल  अऊर शायद एके सबसे बड़ा कारण ई ह की भोजपुरी हमर मातृभाषा ह l ऐला हम ई कविता भोजपुरी के प्रति अनन्य लगाव के कारण लिखतानी अऊर हम आशा करतानी की ई किताब उ सभी भोजपुरी भाषी , जे भोजपुरी से जुडल बा , अध्यन करता  या फिर अध्यन करे के चाहता ओ ला सहायक सिद्ध होइ तथा भोजपुरी भाषा के एगो नया दिशा प्रदान कर सकी  l               
                                                             धन्यवाद



पहिला भाग
 दू  गो  बाल बीर  ,रहे सुर बीर
 कांधा पे धनुष  अऊर  भुजा में तीर
जन्म पूर्व  गुरु आशीर्वाद  मिलल
लव कुश जिनके  नाम पडल  l 

गुरु बाल्मीकि के  छाँव तल
ेजातक संस्कार  के  भाव भरे
 फिर  भी शत्रुधन न  पहचान  सकने
 कर  विधि  विधान  अपन धाम चलने  

भइने तपसुई  , तेज अउर भाव भरल
 माथा  पे  माँ के  आँचल पडल
 दिल में उमंग ना साहस में कम
किरना कर  करस सबके  प्रसन्न l 


    दूसर भाग   
बचपन  में  ही धनुष अभ्यास कईने
 जंगल में घूम घूम  प्रयास कईने
फिर गयान मिलल ,  सम्मान मिलल
दिल  जीते  के वरदान  मिलल  l 

जब  माँ से प्रेम  के  भाव शिखने
जीव जंतु  के तब समझ  सकने
 फिर  गलती  के  एहसास  भइल
 जब  बृक्छ से  रक्त  के प्रवाह  भइल  

तब हाँथ जोड़  छमा स्विकरने
ना भूल  करे के विश्वास  दिलाईने
तब प्रसनता  से  तना हिलल
मासूम मुख पे मुस्कान  खिलल l 


Tisara bhag :- 



फिर माँ  सीता  के आदेश  भइल
नदी में वीरन के  प्रवेश भइल
फिर स्नान कर गुरु  प्रणाम कईने
संध्या वंदना में विलीन भईने 

तब नाग देव के  आगमन भइल
वीरन के ना बेचैनी भइल
गुरु  के ई  सब अंदेशा  भइल
नाग  देव के संदेशा गइल 

हे नाग देव रउआ  वृक्छ  छोड़ी
दूसर  जगह अपन  स्थान  धरी
तब तक वीरन बोल देहने
माँ के  ज्ञान के खोल देहने 

चौथा  भाग -
नाग देव से विनती  कर
उनके मन के मोह लेने
फिर गुरु बाल्मीकि के अनुमति  से
नाग देव  के सहमति से 

कृंणा कुंदन के स्थान बनल
नाग देव  के आवास बनल
जब  कुंडली  जागरण के  समाधान मिलल
ज्ञान मिलल , वरदान मिलल  l 

फिर  राम कथा के  शुरूआत भइल
प्रश्न उठल अऊर बात भइल
समय के  महत्व  के  ज्ञान  भइल
प्रणाम भइल,  प्रस्थान भइल l 

Panchwa bhag :- 

फिर झट  हाँथ  धो  भोजन  पईन
चेहरा  पे  उलझन  झल्कईन
माँ से फिर रहल  ना गइल
खा  मखा  प्रश्न  उठ  गइल 

कुश तू  काहे बाड़ परेशान
कवन  बात  तोहके बा कइले  हैरान
कुश झट से  बोल  देहने
राम कथा  के खोल  देहने 

पूछ  बैठने काहे  राजा  राम
छोड़  देने  सीता  के  बन धाम
जब की राम के रहे सीता  पे बिश्वास
केवल  थोड़ा  जन के कहले  पे 

छठा  भाग  :-
लोगन  के  बात मनले पे
सीता के  जंगल  पठइने
धुप कांट सब में  तडपइने
सीता के  रहे  पूर्ण  विश्वाश 

कह देहली   राज  धर्म  अऊर  पति धर्म के बेहवार
फिर भी  कुश समझ ना पईन
राम के  ही   दोसी  बतलाईने
कुश कहने   जब   होइ राजा  से मुलाकात 

फिर पुछेम हम ईहे  सवाल
लव राजा अऊर बनवासी के भेद बतइने
ना मिले के संकेत  जतईने
कुश स्वयं के रोक ना पइने 



Satwa bhag :- 

गुरु के देवल  ज्ञान दोहरइने
यदि दृढ  संकल्प  होइ जेकार
भगवान रखीहे ओकर ख्याल
फिर रात में जब उ  सुते गइने  l 

गुरु के पुनः बात दोहरइने
माँ से गुरु के बात  बतलईने
कहने  दू नदी के  संगम पे
होइ  पूजा  के शुरुआत 

ओ ला चाही कमल  पुष्प  के  भंडार
माँ  सीता  भी  "हाँ  " जतइली
पति मिलन के  बात बतइली
लव कुश  भईने पूर्णतः भओ चक 

आठवां भाग 

पूछ  बईठने  ढेरो सवाल
कवन  , कहाँ  , के ह पिता हमार ?
सब जग पूछे  ईहे  सवाल
कवन कारन से ना भइल अबतक मुलाकात 

का कवनो  ठेस  लागल बा माई, मन पे  तोहार ?
सीता एके  उत्तर  दिहली
पति  के आपन  देव बतईली
जब  बाटे  माई अइसन बात l 

कहे  ना भइल पिता से मुलाकात
सीता एके  राज छुपइली
गुरु बाल्मीकि के नाम जतईली
फिर दुनू  पुत्र कईने माँ के प्रणाम l

Naua bhag 

गुरु अऊर   समय के कईने  इंतजार
फिर बाल्मीकि देने ज्ञान
दिव्य अस्त्र  ला कईने  ध्यान
दिव्य  अस्त्र के उपयोग  बतईने

सब  देवो  से अस्त्र  मंगईने
पाप  पुण्य  के पाठ पढ़ईने
सर्व श्रेष्ठ  हेतु  देने  आशीर्वाद
दिव्य  अस्त्र कईने  प्रदान

फिर  पूजन करे  के  समय  जब  आइल
लव  कुश  के काम बटाइल
काहे से  की  हर  बाधा बिघ्न  के रोक  सकेने
जरुरत  पड्डल  त   प्राण झोक सकेने 

दशवाँ भाग 

फिर  नदी के  संगम पे कईने प्रस्थान
कमल पुष्प के कईने भंडार
तब तक अश्व मेघ के अश्व  भेटाइल
सब बालक  के मन मोहाईल  

अस्व पे लिखल रहे चुनौती विकराल
लव के रहे फिर भी  स्वीकार
सीता कइली पूजन के  सुरुआत
फिर आइल अयोधया  के सैनिक बिकराल 

तब भइल शीत युद्ध के सुरुआत
सैनिक  लव से  भीड़ गइल
उठा पटक अऊर क्रुद्ध भइल
भाला उथल अऊर  युद्ध  भइल 

ग्यारहवा भाग

अयोध्या  के  सैनिक मूर्छित  भइल
शत्रुधन   जब ई सन्देश  सुनने
आश्चर्य चकित हो तुरंत पहुचने
उहा रहे  दुगो सुन्दर सुकुमार 

शत्रुधन  कहने  छोड़ द घोडा हमार
देख के  मन पुलकित पईन
घोडा  छोड़े  के  याचना  कईने
मगर  दुनू  वीर रहे  अडिग अचल 

युद्ध  करे  ला रहे डटल
कुश जब  शत्रुधन से परिचित  भइने
शत्रुधन  राम के छोटा भाई  बतइने
लव कहने  रउआ  जाई  राम  के  पास 

बारहवा  भाग
उनके  कहेम हमारा बा चुनौती  स्वीकार
शत्रुधन पूर्णतः  क्रोध में  आईने
धनुष  उठा  के  बाण चढइने
कहने  ना छोड़ब  त ना होइ  गलती  हमार 

युद्ध  के  तू  नइख  जानत  परिणाम
लव गुरु  के  आन  देखईने
युद्ध  करेला  तैयार  भइने
युद्ध  में  लव  के  जीत भईल 

शत्रुधन के  सैनिक पराजित भईल
फिर लछमन  आईने अऊर  क्रोध  देखईने
शीत युद्ध  में  पराजय पईन
लछमन  के रहे ढेरो  अभिमान 

Terahwa bhag :- 

छन  भर में  भइल धूल समान
लछमन पर  जब  विजय भइल
सब केहु  के  दिल दहल गइल
फिर  भरत ,  सुग्रीव  अऊर  हनुमान भी  आईन

युद्ध  करे के  चुनौती पईन
भरत  देख एगो सुकुमार
पूछ  बईठने   तू  ही  घोडा  पकडले बार हमार
लव कहने हा हई हम उ कुमार 

जे पकडले बा घोडा तोहार
भरत  कहने हम सुनले बानी , तू बार दुगो भाई
फिर  कहे  बा एके गो  आईल ?
तब  तक कुश भी  आ  गइने 

चौदहवाँ  भाग 

दुगो  भाई के  प्रमाण  जता गइने
तब हनुमान अपन  भक्ति भाव अपनईने
लव कुश  के माता पिता के पईन
फिर भरत ,सुग्रीव  अऊर हनुमान  के परिचय जब पइने 

पूर्ण रूपेण  अचंभित  भईने
लव  कुश तब नत  मस्तक भईने
गुरु  से प्राप्त  ज्ञान दोहरईने
कुश कहने  हम गुरु के  राम  कथा  के  कइनी जब  रसपान 

ओमे बा  राउर  भक्ति के प्रमाण
ओ ला हम  रऊआ  के करेनी प्रणाम
अऊर सुग्रीव जी  रउआ जवन देहले  बानी  मित्रता के प्रमाण
उ  रही  युगो  युगो तक एगो चिन्ह सामान 

पन्द्रहवां भाग 

हे हनुमान  जी  रउआ भक्ति   के सारा सीमा  लंघनी
साथ में  वीरता  के प्रमाण  देखइनी
एला हम रउआ  लोग  के  करतानी  कोटि -कोटि  प्रणाम
मगर हम  बानी रन भूमि में तैयार 

राम के चुनौती  बा हमरा स्वीकार
एला रउआ  लोगिन लौट जाई
जा के सीधा राम के पेठाई
बेयरथ में ना युद्ध कराई 

ऐ पर हनुमान  जी बोल देने
भक्ति  भाओ के खोल देने
कहने  हम बानी श्री  राम  प्रभु के दास
कईसे लौट जाई बिना अश्वा   लेले  साथ 

सोलहवा  भाग

अगर रउआ दे देती  घोडा  ले  जाए  के अनुमति
रउआ  लोगिन के आपन स्वामी बनइति
कुश कहने हनुमान  जी  रउआ बानी बहुते  वीर
साथ में  रउआ बानी बहुते चतुर 

अपन  मधुर - मधुर बातो में ना हमके  फसाई
स्वामी  बनके  लोभ  दे ना हमके उलझाई
रउआ ले  जाई के चाहतानी घोडा अपान
साथ में देवेके चाहतानी बंधी बना ,वीरता के प्रमाण 

लव कहने भैया सीधा  -सीधा बात  बतियाई
अश्व   पकडले बानी युद्ध  के चुनौती पाई
हनुमान जी कहने हम बानी  जाए  के तईयार
मगर  जा के का कहेम बारे में  तोहार ? 

सत्रहवाँ भाग 

नाम  पता  ना तू  आपण देहल
माता  - पिता  के  ना नाम  बतइल
लव  कहने  रउआ घोडा ला  बानी आइल
युद्ध  भूमि में  कैसे  नाम , पता  आऊर  गोत्र  बताई 

ना होता  इहवा  कवनो शादी के बात
युद्ध  के रउआ करी शुरुआत
या त रउआ पराजय  स्वीकार के जाई
या फिर  रउआ वाण उठाई

भारत  भइने क्रोध से लाल
कहने  ना कर तू  पराजय  के बात
रघुकुल के गाथा में नइखे एके  इतिहास
लव कहने लक्छमण,शत्रुधन का ना ह  लोग राउर भाई 

अठारहवाँ  भाग

जे कही  मूर्छित   हो बा शिविर  में पटाईल
ईहे रघुकुल   के बा रउआ अभिमान
जे दे रहल बा छणित हो छीणता के प्रमाण
भरत शीत युद्ध में पराजित भईने 

कुपित हो आपन बाण उठईने
तब धरती आकाश  सब डोल गइल
मूर्छित  काल मुह खोल गइल
फिर दुनू  ओर से भइल बाणो के बरसात 

जल ,नभ  , वायु सब सकती के पश्चात
भारत  अऊर सुग्रीव  के मूर्छित कईने
हनुमान  के  आपन  बंधी बनइने
ई बात सुन  राजा राम 

उन्नीसवाँ भाग :-

स्वयं  बन  में  कईने प्रस्थान
राम उहा  देख दुगो सुकुमार
कहने  नइखे  होत हमके विश्वास
भरत ,लक्छमण ,सुग्रीव जइसन योद्धा  के तू
मूर्छित  कईल 

हनुमान के तू बंधी बनइल
कुश कहने  रउआ सामने  बाने हनुमान
दे सकेने सत्यता  के प्रमाण
राम  के जब दिखने  बंधी हनुमान 

कईने  उनसे एगो सवाल
कहे तू दुबकल. बार पवन  पुत्र  विकराल
जब  की तू  कहल जल वीर हनुमान
हनुमान  कहने हम बानी इनके दास 

बिस्वा भाग 

ना कर पाएं राउर सेवा हे ज्ञान प्रकाश
एक त कर हम  पे  विश्वास
खोल देने हमर  हाँथ , दे खाए के आस
एला हम रउआ से  करतानी छमा हेतु  विश्वास 

फिर राम ई सुन अचंभित भैयने
सबके मूर्छा हेतु संकेत जतईने
लव कुश हनुमान के तरफ  इशारा कईने
सिद्ध करे हेतु प्रमाण  देखईने 

तब राम सत्यता के पईन प्रणाम
हनुमान  कहने हम  इनके माता पिता के करतानी प्रणाम
जे  देले  बा ई  वीरन के जन्म अऊर ज्ञान
फिर राम कहने  ना  तू  हऊs   कही के राजकुमार

एकैस्वा भाग 

जे तू  रहब हमसे  ईर्ष्या  के  शिकार
फिर  कहे  पकडले बार अश्व हमार
कुश कहने  ना बा कवनो अश्व से  हमके  विकार
ना कवनो  बा  ईर्ष्या हमार 

बस अश्व  के मस्तिष्क पे लिखल  चुनौती  बा  हमके स्वीकार
जेमे दिखता ढेरो अहंकार
हम हई छत्रिय राज  कुमार
एल हमारा हर चुनौती  करके  पड़ेला स्वीकार

रउआ  बानी  छत्रिय  धर्म  के  ज्ञानी
यदि कवनो  छत्रिय पीठ  देखा  के  जे  भागी
उ ना त माँ के  दूध  के ऋण चुकाई
अऊर ना  आपन पिता के लाज बचाई 

बाईसवाँ  भाग  :-

राम कहने , का  तोहके  मिलल बा  तंत्र मंत्र  के  ज्ञान  ?
कहे से की हम नइखी  युद्ध  करे  के  तैयार
जब  की  तू कइले  बार s    ढेरो  अपराध
कुश कहने  बा  कुछ  हमरो अइसने संग्यान 

लगता रउआ करतानी  मोहनी मंत्र  के  जाप
राम  ई सब सुन अचंभित  भइने
ना युद्ध करे के संकेत  जतईने
कहने तू लौटा द घोडा  हमार 

हम  करेम  छम्य  तोहर सब अपराध
लव  एके उत्तर देहने
युद्ध  करे  के  संकेत  जतईने
कहने  युद्ध  करेला होइ तैयार

तेईसवाँ भाग :-

युद्ध में जीत ले  जाइ घोडा अपान
मगर  जे पराजित  हो  के  गइनी
सारा विश्व में समझी  नाम गवईनी
बस एके गो रउआ लगे विकल्प बा एकार 

युद्ध करि सिर्फ  युद्ध ला  बानी  हम  तैयार
फिर  लव राम के  सपथ  दिलइने
युद्ध करे ला ललकार  सुनईने
तब  धरती , आकाश  सब  डोल  गइल 

विकराल  काल मुँह  खोल  गइल
सब  जग में  हाहा  कर मचल
देवता सब में  शोर  भइल
तब जिव जंतु  भी  बोल गइल 

चौबीसवाँ  भाग  :-

बिजली  कडकल अउर जोड़ भइल
त्रहिमाम  त्राहिमाम  के  आवाज उठल
देवता लोग  के आसान  हिलल
फिर  हनुमान कर  विधाता  के  प्रणाम 

कहने  बिछल  बा कइसन  नियति के जाल
एक तरफ बाने पिता अडिग  अचल
त दूसर तरफ बा पुत्र अडल
युद्ध रोक करी कवनो समाधान

सुन ली हे विधाता बिनती हमार
तब तक राम क्रोध में आइने
युद्ध करे ला बाण उठइने
फिर बाल्मीकि झट से पहुच गईने

पच्चीसवाँ भाग :- 

आवाज सुन  राम चकित  भइने
बाल्मीकि कहने  हे राजा  राम
ई का करतारs  हो अनजान
अऊर कहे करतार  राज धर्म  के  अपमान 

राम  सुन महर्षि  के ज्ञान
कइने पैर छू के  प्रणाम
राम कहने  दुनु  बाल बड़ी  हठी बाने
युद्ध  करे  ला  डटल बाने 

बाल हट  के  बा  सबके  ज्ञान
का  राज धर्म  ह  एके  परिणाम
स्त्री , बाल  अउर वृद्ध  चाहे  करे  अपराध
राजा के  ना उठे  के चाही हाँथ 

छब्बीसवाँ  भाग  :-
कुश लव  तू  बारs  दंड  के  भागी
अस्व  पकड़  भइलs  अपराधी
कवन  कारन  से  अस्व के  धइलs
अस्व  पकड़ अपराधी भइलs 

लव  कहने  दुगो कारन  बा  एकार
अस्व के मस्तिष्क  पे  लिखल बा चुनौती बिकराल
का  लिखल बा  रउआ सुनी सुनाई
पढ़  के रउआ हम  बतलाई 

राज राजेस्वर  राम  चंद्र  के नाम  गोधाइल
अस्व मेघ  यज्ञ के  घोडा  स्वतंत्र भ्रमण ला छोड़ाइल
जे एके  सामने नत मस्तक हो  जाइ
ओक राम  चंद्र के शरण   भेटाई
  

    सत्ताईसवाँ भाग :-

अउर जे अश्व  के  बंधी  बनाई
उ युद्ध के चुनौती पाई
फिर गुरु जी रउआ देले बानी ज्ञान
सच्चा छत्रिय  के  बतलईले  बानी स्वाभिमान 

छत्रिय हो कइसे  पीठ देखइती
युद्ध ना कर कइसे  वापस अति
दूसर कारण बाटे एकार
कुश भईया के पूछे के रहे सवाल 

राजा  राम के जे आज्ञा होइत
उनसे एगो प्रश्न  पुछाइत
राजा  राम  मस्तिष्क हिलइने
प्रश्न   पूछे के  संकेत  जतईन 

अठाईसवाँ भाग :-

कुश  कहने  रउआ एगो  बात बताई
मर्यादा परुसोत्तम  रउआ  जग  में कहाई
केवल  कुछ  लोग  के कहले  से
सीता के रउआ  देनी  बन  में पैठाई 

ई कवन  धर्म  ह  हमके  बताई
कहे सीता के देनी रउआ बन  में  पैठाई
राजा  राज  धर्म  अउर साधारण   जन के भेद बतलाइए  (batlaine)
राज धर्म के साधारण  जन  से ऊपर देखइने 

कहने  जनता  ला  सर्वस्य  करेके पड़ेला परित्याग
चाहे  सहेके  पड़े  दर्द भरल  जीवन  में  आग
कुश कहने  तब  मतलब  भइल एकार
पाप के भागी  बा अयोघ्या के  जन  परिवार

उन्तीसवाँ भाग :-

बाल्मीकि  कहने  हे  राजा  राम
जन से  पूछ s  जन के  सवाल
लव  कुश  तू  कइले  बार s  अपराध
राजा  होला  पिता  समान 

एला पहिले छमा सुकर s
के  भागी तू भइल बार s ( here some mistake )
लव  कुश आपन सर झुकइने
सर  झुका के  प्रार्थना  कइने 

खुश  कहने  हे  राजा राम
छत्रीयोजित समझ हम कइनी अपराध
एला  हम बानी  दंड के  भागी
रउआ जवन भी दंड बता दी 

तीसवाँ  भाग  :-

ओके हम  सहज करेम सिवकार
ई बा दृढ  प्रतिग्या हमार
राम कहने ना बार s  तू कवनो दंड  के भागी
अउर ना बार s  तू कवनो अपराधी 

जवन राज में  बा तोहरा जइसन  वीर  बलवान
उ राज अऊर राजा के सदैव बनल रही सम्मान
तू बार पुरुस्कार के  अधिकारी
साथ  में बार s  सत्य अउर सदाचारी 

जे दिन तोहार शिक्छ होइ  समाप्त
अउर यदि तोहरा होइ गुरु , माता -पिता  से अधिकार  प्राप्त
ऊ दिन  तू  हमर  राज में अइह
राज में आके अपन स्थान  तू पहिया

एकतीसवाँ भाग :-

गुरु कहने  जे दिन  समय  ई आई
ओ दिन ई लोग  सवाल  उठाई jaan jaii
ओ दिन  लोग ई सवाल उठाई
लव कुश अब तू कर s  प्रस्थान 

चैतन्य अस्त्र के कर s ध्यान
चैतन्य अस्त्र से मूर्छा हटा द
सब  केहू के होश  में  ला द
ताकि सब केहू करे प्रस्थान 
अस्व  मेघ के कर  सक s विधि -विधान 

लव कुश कर गुरु प्रणाम
चल देने स्वमं राजा के साथ
सब केहू के होश में लइने
होश  में  लेक अयोघ्या पठइने 

बत्तिसवा  भाग :-

तब  गुरु कहने  हे पवन पुत्र हनुमान
अस्व मेघ  यज्ञ के अस्व  ले जाइ अपना साथ
हनुमान "हाँ" ला सर हिलइने
प्रश्न पूछे  ला संकेत जतईन 

कहने  हे गुरु महाराज रउआ एगो बात  बताई
रउआ के  राउर ईंट के हम  सपथ दिलाई
दुनो  बालक के माता  पिता के नाम हमके जनाई
तब कहने गुरु  महाराज 

तू हव s वीर भक्त  हनुमान
तू पहिले से एके  जानतारs
लव  कुश  के पहचान्तरs
फिर  भी बा एगो बिनती  हमार

तैतीसवाँ भाग :-

ना खोलिह ई राज  के बात
उचित  समय जब एके आई
स्वमं सबे ई जान जाइ
हनुमान  हाँथ  जोड़  कइने प्रणाम 

अश्व ले  कइने  प्रस्थान
लव कुश  कर  कमल  पुष्प  भंडार
चल देने सीता  के  आँचल भरल  संसार
फिर माँ से युद्ध के बात बतईने 

युद्ध में सबके  पराजित  कइने
सीता सुन ई सारा  बात
रो पडली ले अश्रु के भंडार
कहली हनुमान  के  तू  बंधी  बनइल s 

चौतीसवाँ  भाग  :-

लक्छमन,  भरत, सुग्रीव से कहे  युद्ध तू कइल ?
ई  लोग  बा  हमार  पुत्र समान
तोहनीके  नइखे  एके  ज्ञान
तोहनी के कहे राम के  बोलइल s 

युद्ध  करे  ला  कहे  विवश  तू  कइल
तोहनी के मालूम  नइखे  एके परिणाम
युद्ध जे  भइल रहित  कइसे होइत  पश्चयताप
तोहनी के आपन पिता के  ही  चुनौती  कइल 

युद्ध  करे  हेतु बाण  उठईल s
अगर  एको  बार जे कइले  रहत  प्रहार
ना  होइत प्रायचित कबो  एकार
अउर तब दे  देती  हम  प्राण  अपान

पैतीसवाँ भाग :-

ई सुन लव कुश अचंभित भइने
पिता के न जाने  के संदेह  जतईन
एके  मतलब  का  तू  ही  हउ  माता  सीता
वन में  घूम - घूम  जे  जीवन  जियता 

कहने  माई जब बा अइसन  बात
काहे ना तू कइलू पहिले  ज्ञात
वाल्मीकि तब  तक  आ  गइने
समये  के  महत्व  जता गइने

कहने  पहिले  जे  ई बात  बतइति
सीता के मुश्किल में  पहुचइती
अगर जे  जन जानित ई  सब  बात
सीता  के  होइत हर  जगह  समस्या  से मुलाकात 

छत्तीसवाँ भाग  :-

कहने  वरसो से  रहे  हमारा  इहे  समय के  इंतजार
जब तू कर सक s  घूम - घूम  सीता  हेतु  प्रचार
अयोघ्या के जन से तू पूछ  सक s
सीता पे  निंदा के दाग ढूढ़ सक s 

अयोघ्या जा के अब  तू कर सँ  सीता  के  गुण  गान
घर  -घर घूम कर  s  सीता के  सुन्दर  बखान
ताकि जनता के सीता  के  प्रति  दिल  झूम  उठे 

Saitiswa भाग :-

प्रेम के  भाव सब  में फुट सके
जनता नत्मस्तक हो  सीता के   करे  प्रणाम
पुनः  सिंघासन  हेतु करे  प्रणाम
जनता  प्रायश्चित कर पाप  धुले 

सीता  के  सिंघासन  पुनः  मिले
अयोधया  में  सीता , लव  कुश  संनिहित फूल फिर  खिले
राज परिवार  पुनः एक दूसरा  से मिले
तब लव  कुश  कर गुरु  प्रणाम 

भइने अयोध्या  हेतु  प्रस्थान
अयोघ्या पहुँच गीत ऊ  गइने
गीत के  माध्यम सीता  के  गुण  गइने
गीत सुन  सब जन प्रफुलित भइल 

अड़तीसवाँ भाग  :-

सीता  के प्रति सबके  दिल  झूम  गइल
आँखों  में  जन के अश्रु भरल
पाप  पुण्य के एहसास  जागल
तब  बात  राजा  जे  सुनाने 

लव कुश के  सन्देश  पीठइने
लव कुश  सुन राजा  के बात
पहुँच गइने ऊ  राज दरवार
देख  राजा के पुलकित  भइने 

नतमस्तक  हो प्रणाम  उ  कइने
सर पे राजा के  हाँथ जब  पइने
आँखों से अश्रु छलकइने
राम  फिर सिना से लगइने  

उन्तालीसवाँ भाग :-
राम  कथा हेतु दरवार  बोलइने
फिर दरवार सजा  दरवार लगइने
दरवार  लगा  , सिंघासन पइने
फिर दुनु सुकुमार  जब अइने 

राज सभा  में सबके प्रणाम  उ कइने
राजा  से प्रुस्कार   ऊ  पइने
फिर  अपन सिंघासन धइने
फिर राम कथा के  भइल सुरुआत 

सब जन रहे  एक  ही  साथ
सबके दिल  में दया  उथल
करुणा सहित  माया  उथल
अयोघ्या  में  भइल  अश्रु  के बरसात 

चालीसवाँ भाग  :-

जब जन  कएलक   राम  कथा  के  रसपान
फिर  लव कुश सीता  के  ब्यथा  के  गइने
राम के आपन  पिता  बतइन
ई सब सुन सभे  भइल  अचंभित 

सर  झुका सभे भइल लज्जित
लेकिन  कुछ जन में असंतोस रहल
एला प्रमाण  हेतु  डटल  रहल
फिर  राज सभा  में  भइल बाद-  बिबाद 

प्रमाण हेतु  उथल आवाज
तब गुरु  के इंसाफ  ला आवाज गइल
गुरु से  फिर आवाज  राम  के  भइल
फिर राम  कइने  एके  इंसाफ

Ektaliswa bhag

कहने सीता बाड़ी पवित्र अउर साफ
लेकिन हमार बा अयोधया  पे  साम्राज्य
एला  हम हई एगो राज कुमार
सर्व प्रथम हम राज धर्म  निभाइएम 

अउर प्रजा के  असंतोष मिटाएं
एला सीता के देवे के  होइ शुद्धता के प्रमाण
ताकि  अयोघ्या  में ना रहे असंतोष  भरल ज्ञान
सबके समक्छ   कहने  घोषणा बा हमार 

भियान लागी फिर से राज  दरवार
सीता बाल्मीकि के  अनुमति से  एहिजा  अहियन
शपथ   ले शुद्धता  के प्रमाण  देखहियन
एला सब  केहू एहिजा आई 

बयालीसवाँ भाग  :-

स्वमं प्रमाण  देख  मन के मइल मिटाई
ई  सुन कुछ  लोग सन्न भइल
लव कुश पूर्णतः  चिंतित भइल
फिर  ई बात  बाल्मीकि  के गइल 

स्त्री अपमान  हेतु  संकेत  भइल
मगर  बाल्मीकि कहने  कर ज्ञात
पति व्रता पत्नी के (पति हेतु ) करके  पड़ेला सब  कुछ स्वीकार 
एला  राजा जवन भी चहिए 

सीता  ओके  प्रमाण  देखइहें
फिर माँ  कहली  केतन  पत्थर  दिल बा तोहार
सीता के तू काहे कइल s   राज  सभा में अपमान
अगर  तोहार बा सीता पे विश्वास  
  

   तैतालीसहवा भाग :- 
त फिर  का  होइ शुद्धता के प्रमाण
राम  कहने हम  विवश बानी माई
शुद्धता   के प्रमाण  ना हमके चाही
मगर राज धर्म  के बेडी में हम  जकड़ल  बानी 

सर्वस्य  त्याग  कर  हम  सीता  के  तरह  अकडल बानी
एला सीता जे  दे  दिहन  प्रमाण
ना रही  जनता  में  असंतोष  भरल  ज्ञान
तब वाल्मीकि सीता  के  समझइन  

पुनः  प्रमाण हेतु  बात  बतईने
राम  के ब्यथा के गान ऊ  गइने
राजा के  सर्वस्य उचित बतईने
सीता  ई बात  झट समझ गइली 

चउअलस्वा  भाग :-

अशंतोष मिटावे हेतु अडिग भइली
फिर  लागल  राज दरवार
सब  केहू  ताकत  रहे द्वार
तब  वाल्मीकि आगे ,  पीछे  सीता  अइली 

लव  कुश के भी  साथ में  लेअइली
तब  बाल्मीकि के  सब केहू  कइलक   प्रणाम
एक साथ सब  केहू उनपर कइलक  ध्यान
तब वाल्मीकि के आवाज उठल 

धर्म पुत्री हेतु बात  उठल
वाल्मीकि  कहने  हे राजा राम
सीता आइल बारी आग्यानुसार
लोक अपवाद से जे तू डरल बार s  

पैतालीसवाँ भाग :-
पवित्रता के  प्रमाण हेतु अडल  बारs
ओ ला आज्ञा द हे दशरथ नंदन
सीता देखइहें  पवित्रता के बंधन
लेकिन ओ से पाहिले एगो बात  सभे  सुनी 

हम प्रचेता के दसवा पुत्र  महर्षि बाल्मीकि ऋषि मुनि
सब  के  सामने शपथ    ग्रहण  करअतानी
लव  कुश  राम  के पुत्र ह ई कहतानी
अगर सीता  में होइ  कवनो  दोष 

नस्ट  हो  जय  हमर पुण्य  प्रमोद
सीता  पूर्णतः  सती बारी
राम  के ही  सदैव  पति मनले  बारी
अगर  हमर  बात पे जे  होए विश्वाश 

छियालीसवाँ भाग :-

त सीता के मिले  राज सिंघासन के सम्मान
राम कहने हे गुरु महराज
हमारा बा  राउर निर्दोष बचनों  के ग्यान
अऊर पाहिले भी भइल  बा शुद्धता   के प्रमाण 

मगर फिर  बाद में अपवाद  उठल
जेसे सीता के परित्याग करेके  पड़ल
एला हम विवश बानी
सीता के  परिचय हेतु  अडल बानी 

सीता  के परिक्छा   हो जाये एक बार
सब  लोग देख ले एक ही साथ
सुन  सीता ई आगे बढली
शपथ   हेतु अग्रसारित  भइली  

सैतालीसवाँ भाग :- 

ई  देख सब जन भइल  खड़ा
लज्जित हो  देलक  सर नीचे  गड़ा
तब सीता सबके  प्रणाम कइली
गुरु  अऊर पति  से  आशीर्वाद  उ  पइली 

सपथ ले  कहली हे  राम चंद्र  महाराज
रउआ  बानी हमर पति , देव  समान
रउआ छोड़ ना हम दूसर के देखनी
रउआ  के ही सदैव पति हम मनानी 

अगर ई  बात  होइ जे सत्य  हमार
त धरती माँ  अपना गोद  में स्थान दी  हमारा
ई सुन धरती माँ प्रकट भइली
सीता के अपना  गोद  में स्थान  दिहली 

अड़तालिशवा  भाग  :-

फिर सारा जन में हाहाकार  मचल
त्राहिमाम - त्राहिमाम  के आवाज उठल
सारा  जन अपन गलती  स्वीकरालक
छमा हेतु प्राथना   कइलक   
 
ई देख  लव कुश  बोल उठने
ना जाये हेतु मुह  खोल उठने
सीता कहली  पुत्र हमार
मनुष्य  ला पिता ही होला सब संसार 

अब  तू पिता  के  संरछण  में रहिय
पिता के प्रेम अब तू पइह$
फिर सीता कहली  हे राजा राम
ना  देम  कवनो दंड , भूल करे ला  प्रजा के अपना  

उन्नचासवाँ भाग :- 

सीता  ई  कह धरती  में  स्मैली
प्रेम  पूर्वक  विदा  उ जतैली
फिर  राम  भइने  क्रोध  से  लाल
देखे  लागल सारा संसार 

तब तक  भगवान  ब्रह्मा प्रकट भइने
राम  के क्रोध  के  शांत  उ कइने
ब्रह्मा  कहने  हे  राजा  राम
सीता से होइ अब तोहार  साकेत - धाम  में  मुलाकात 

एला ना तू  कर$ पश्चाताप
आपन वैस्नव रूप के कर तू ध्यान
लव कुश  फिर   आवाज लगइने
दिल के आपन  बात  बतईने 

पचासवाँ  भाग  :-

कहने  काहे  गुरु महाराज
माता  छोड़  के  चल गइली  हमार
तब बाल्मीकि  कहने  हे शिष्य हमार
जग  जननी हई माता  तोहार 

तोहके छोड़  उ कही  ना गइली
तोहार   हृदय में  बास उ  कईली
जब  तू करब$ अंतरमुख   हो  ध्यान
सीता  के पइब  अपना  साथ

बाल्मीकि  कहने , हे महाराज
शॉप   के  जातानि  पुत्र  तोहार
अब इनके  उत्तर दायित्व  संभाल$
हमर जाए के अनुमति सुइकार$  
एकवनवा भाग :- 

वाल्मीकि   कइने उहवाँ  से   प्रस्थान
राज  दरवार  भइल  सुन - सान
लव  कुश  तब  महल  के  पइने
नया  जीवन  के  शुरुआत   उ  कईने ! 
    


  

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